बरखा रानी
बरखा रानी बरखा रानी,
गाँव मेरे भी झर जाओ।
सूखे हैं सब ताल तलैया,
पानी से यह भर जाओ।।
टिपटिप-टिपटिप रिमझिम -रिमझिम,
सावन जाने किधर गया।
नाचे मोर पपीहा गाते,
मौसम कैसे गुजर गया।।
अब बूँदों की सरगम से,
हर्षित मन ये कर जाओ।।।
बरखा रानी बरखा रानी...
कब से बैठे आस लगाये,
नन्हें-मुन्ने हम सब बच्चे।
हाथ जोड़ विनती हम करते,
कितने सच्चे कितने अच्छे।।
हम कागज की नाव चलायें,
काम भले कुछ कर जाओ।।।
बरखा रानी बरखा रानी..
खत्म हो गया हो जो पानी,
बादल काका से ले आओ,
करें अगर वो आनाकानी,
आकर हमको बतलाओ।
लेकर अर्ज हमारी फिर तुम,
इन्द्रदेव के घर जाओ।।।
बरखा रानी बरखा रानी,
गाँव मेरे भी झर जाओ।
सूखे हैं सब ताल तलैया,
पानी से यह भर जाओ।।
रचयिता
राजवीर सिंह 'तरंग',
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिलहरी,
विकास क्षेत्र-सिलहरी,
जनपद-बदायूँ।
गाँव मेरे भी झर जाओ।
सूखे हैं सब ताल तलैया,
पानी से यह भर जाओ।।
टिपटिप-टिपटिप रिमझिम -रिमझिम,
सावन जाने किधर गया।
नाचे मोर पपीहा गाते,
मौसम कैसे गुजर गया।।
अब बूँदों की सरगम से,
हर्षित मन ये कर जाओ।।।
बरखा रानी बरखा रानी...
कब से बैठे आस लगाये,
नन्हें-मुन्ने हम सब बच्चे।
हाथ जोड़ विनती हम करते,
कितने सच्चे कितने अच्छे।।
हम कागज की नाव चलायें,
काम भले कुछ कर जाओ।।।
बरखा रानी बरखा रानी..
खत्म हो गया हो जो पानी,
बादल काका से ले आओ,
करें अगर वो आनाकानी,
आकर हमको बतलाओ।
लेकर अर्ज हमारी फिर तुम,
इन्द्रदेव के घर जाओ।।।
बरखा रानी बरखा रानी,
गाँव मेरे भी झर जाओ।
सूखे हैं सब ताल तलैया,
पानी से यह भर जाओ।।
रचयिता
राजवीर सिंह 'तरंग',
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय सिलहरी,
विकास क्षेत्र-सिलहरी,
जनपद-बदायूँ।

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