हरेला
सावन आया, हरेला आया,
मनु जाति के लिए संदेश लाया।
लोक संस्कृति को अपनाओ,
जीवन का सब सार है पाओ॥
बिन वृक्षों के क्या है जीवन?
धरती में हरियाली लाओ॥
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ,
हर घर, हर आँगन को महकाओ।
साँसें जीवन की बचाओ,
फल, छाया का भंडार बढ़ाओ।
बाढ़, प्रदूषण दूर भगाओ,
पूर्वजों की धरोहर बचाओ।
भावी पीढ़ी को साथ में लाओ,
हरेला का महत्व समझाओ।
लगाकर वृक्ष धरा पर अपार,
हरेला पर्व का त्योहार मनाओ॥
रचयिता
सुनीता मैन्दोलिया,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय धीमरखेडा नवीन,
विकास खण्ड-काशीपुर,
जनपद-उधम सिंह नगर,
उत्तराखण्ड।
मनु जाति के लिए संदेश लाया।
लोक संस्कृति को अपनाओ,
जीवन का सब सार है पाओ॥
बिन वृक्षों के क्या है जीवन?
धरती में हरियाली लाओ॥
पेड़ लगाओ, पेड़ लगाओ,
हर घर, हर आँगन को महकाओ।
साँसें जीवन की बचाओ,
फल, छाया का भंडार बढ़ाओ।
बाढ़, प्रदूषण दूर भगाओ,
पूर्वजों की धरोहर बचाओ।
भावी पीढ़ी को साथ में लाओ,
हरेला का महत्व समझाओ।
लगाकर वृक्ष धरा पर अपार,
हरेला पर्व का त्योहार मनाओ॥
रचयिता
सुनीता मैन्दोलिया,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय धीमरखेडा नवीन,
विकास खण्ड-काशीपुर,
जनपद-उधम सिंह नगर,
उत्तराखण्ड।

Bahut Sundar
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