हरेला पर्व
प्रतिवर्ष माह जुलाई में मनावें हम सब हरेला पर्व
लगा एक-एक पौध धरा बन जाए स्वर्ग।
प्राणवायु देती है हरियाली
बाढ़ कटाव को भी रोके हर डाली।
लगा पौध, सींचें उसे नित्य प्रति
मानो उसे तुम अपना हितैषी।
प्रकृति प्रेम का जब भाव जगेगा
अपूर्वानंद से मन प्रफुल्लित होगा।
एक-एक पौध जब हर मानव लगाए
तो कैसे धरती पर संकट आए।
तब ना होगा व्याधि विकार का डर
हर आदम जिए होके निडर।
धीमे-धीमे एक दिन आएगा
वह पौध ही विशाल बन जाएगा।
खिलेंगे फूल देगा फल, छाया
हो अनुपम अनुभूति जागे महामाया।
जब दिखे चौतरफा हरा-भरा
आया हरेला सावन भी बरसा।
नदी, नाले, ताल, सरोवर
गाएँ तब गीत मनोहर।
मेघ जब गरज-गरज बरसे
नित्य धरा पर नवजीवन बरसे
आओ चलो मनावें हरेला
देखो त्योहारों का भी आया रेला।
रचयिता
जानकी दानू,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय थनगीरा,
संकुल-कुराड़,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
लगा एक-एक पौध धरा बन जाए स्वर्ग।
प्राणवायु देती है हरियाली
बाढ़ कटाव को भी रोके हर डाली।
लगा पौध, सींचें उसे नित्य प्रति
मानो उसे तुम अपना हितैषी।
प्रकृति प्रेम का जब भाव जगेगा
अपूर्वानंद से मन प्रफुल्लित होगा।
एक-एक पौध जब हर मानव लगाए
तो कैसे धरती पर संकट आए।
तब ना होगा व्याधि विकार का डर
हर आदम जिए होके निडर।
धीमे-धीमे एक दिन आएगा
वह पौध ही विशाल बन जाएगा।
खिलेंगे फूल देगा फल, छाया
हो अनुपम अनुभूति जागे महामाया।
जब दिखे चौतरफा हरा-भरा
आया हरेला सावन भी बरसा।
नदी, नाले, ताल, सरोवर
गाएँ तब गीत मनोहर।
मेघ जब गरज-गरज बरसे
नित्य धरा पर नवजीवन बरसे
आओ चलो मनावें हरेला
देखो त्योहारों का भी आया रेला।
रचयिता
जानकी दानू,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय थनगीरा,
संकुल-कुराड़,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

बेहतरीन कविता। हरेला की शुभकामनाएं💐💐💐
ReplyDeleteAwesome dear👌👌👌👌
ReplyDeleteवाह!!सुन्दर रचना
ReplyDeleteबेहतरीन रचना मैम
ReplyDeleteअप्रतिम कविता
ReplyDeleteVvvvvv nice dear
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