जल
जल अपनी कहानी आज सुनाता,
कहीं दिखता तो कहीं छुप जाता,
कभी घटता तो कभी बढ़ जाता,
बस यूँ ही नाच दिखाता रहता।
जीवन सदा ही, सबको यह देता,
जलीय जीवों की है आवश्यकता,
ऑक्सीजन बिना यह काम न आता,
मिलकर साथ ऑक्सिजनटेड कहलाता।
गर्मी में यह पहुँचाए शीतलता,
स्वभाव में बसे सदा निर्मलता,
व्यवहार में होती अधिक सुंदरता,
घुल-मिलकर यह लाये मधुरता।
पर्वतों पर हिम रूप में दिखता,
हिम पिघले जब, असल रूप दिखाता,
पिघल- पिघल कर खो देता स्थिरता,
गिरिराज तब छोड़ बहता यह जाता।
सरिता रूप में है इसके कोमलता,
हावी न इसपर पाषाण की कठोरता,
छोड़ पीछे सब, पथ बनाता जाता,
चलते ही सदा रहना जीवन कहलाता।
रचयिता
आस्था शर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय इस्लामनगर,
विकास खण्ड व जनपद - मुरादाबाद।
कहीं दिखता तो कहीं छुप जाता,
कभी घटता तो कभी बढ़ जाता,
बस यूँ ही नाच दिखाता रहता।
जीवन सदा ही, सबको यह देता,
जलीय जीवों की है आवश्यकता,
ऑक्सीजन बिना यह काम न आता,
मिलकर साथ ऑक्सिजनटेड कहलाता।
गर्मी में यह पहुँचाए शीतलता,
स्वभाव में बसे सदा निर्मलता,
व्यवहार में होती अधिक सुंदरता,
घुल-मिलकर यह लाये मधुरता।
पर्वतों पर हिम रूप में दिखता,
हिम पिघले जब, असल रूप दिखाता,
पिघल- पिघल कर खो देता स्थिरता,
गिरिराज तब छोड़ बहता यह जाता।
सरिता रूप में है इसके कोमलता,
हावी न इसपर पाषाण की कठोरता,
छोड़ पीछे सब, पथ बनाता जाता,
चलते ही सदा रहना जीवन कहलाता।
रचयिता
आस्था शर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय इस्लामनगर,
विकास खण्ड व जनपद - मुरादाबाद।

चलते ही सदा रहना जीवन कहलाता।
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर कविता और विचार।