बदलते बच्चे
उदास फिरता है मोहल्ले में,
बारिश का अब पानी भी।
कश्तियाँ बनाने वाले बच्चे
मोबाइल से इश्क कर बैठे।
कौन सुनेगा दादी नानी से
परियों की कहानियाँ अब।
देखो नन्हें कोमल पुष्पों को,
Pubg से दिल लगा बैठे।
कोरी हैं अब रामायण की बातें,
स्वाति बिन सीपी पर बरसाते।
कैसे सुनें एक-दूसरे की तकलीफें,
जब मोबाइल में गर्दन झुका बैठे।
कहते थे कभी लोग ठेंगा जिसे,
आज उसे सब लाइक बना बैठे।
असल जिंदगी में नहीं है कोई अपना
सोशल मीडिया पर कतारें लिए बैठे।
रचयिता
अनुज पटैरया "आदिशेष",
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय टिकरिया,
विकास क्षेत्र-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।
बारिश का अब पानी भी।
कश्तियाँ बनाने वाले बच्चे
मोबाइल से इश्क कर बैठे।
कौन सुनेगा दादी नानी से
परियों की कहानियाँ अब।
देखो नन्हें कोमल पुष्पों को,
Pubg से दिल लगा बैठे।
कोरी हैं अब रामायण की बातें,
स्वाति बिन सीपी पर बरसाते।
कैसे सुनें एक-दूसरे की तकलीफें,
जब मोबाइल में गर्दन झुका बैठे।
कहते थे कभी लोग ठेंगा जिसे,
आज उसे सब लाइक बना बैठे।
असल जिंदगी में नहीं है कोई अपना
सोशल मीडिया पर कतारें लिए बैठे।
रचयिता
अनुज पटैरया "आदिशेष",
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय टिकरिया,
विकास क्षेत्र-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।

बहुत खूब लिखा है। कटु सत्य।
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