आओ धरती का श्रृंगार करें

सावन का महीना आया है
काले बादल संग लाया है
धरती माँ को सिंचित करने
बादल पूरा कुटुम्ब संग आया है
 वर्षा की रिमझिम  बूँदों से
 यह हरियाली करने आया है
  आओ हम सब भी मिलकर
 धरती माँ का श्रृंगार करें
 वृक्षारोपण करके हम तुम
 देश में हरियाली लाएँ
 भूस्खलन को रोकने का
 हम सब मिलकर जतन करें
 आओ हम सब मिलकर
 धरती माँ का श्रृंगार करें
   फूलों से  महकेगी धरती
     वृक्षों से सजेगी धरती
उड़ते इन परिंदों के लिए
 घोंसलों का इन्तजाम करें
 हरियाली छा जाएगी
घास  फिर उग आएगी
  मिलकर हम इन पशुओं के
 आहार का इंतजाम करें
 आओ हम सब मिलकर
 धरती माँ का श्रृंगार करें
 पौधे हम लगाएँगे
 करके देखभाल इनकी
 वृक्ष इनको बनाएँगे
 वायुमंडल के प्रदूषण को
 यह वृक्ष ही फिर भगाएँगे
 पानी को संचित कर खुद में
   जीवन हमारा जल देकर बचाएँगे
 मिट्टी को रखेंगे जकड़ कर
 मलबा ना आने देंगे सड़क पर
वर्षा के भारी वेग को
 ये वृक्ष ही रोक पाएँगे
 बाढ़ की बर्बरता से भी
 यह हम सबको बचाएँगे
 आओ हम सब मिलकर
 धरती माँ का श्रृंगार करें
आओ हम सब मिलकर
 वनों का विस्तार करते हैं
  यह वृक्ष ही पशुओं के हित
 चारा देते हैं
  हमारे घरों के चूल्हे जलाते
उद्योगों के लिए लकड़ी देकर
 जीवन को आसान हैं करते
 स्कूल और घर के फर्नीचर
 बच्चों कहाँ से आते हैं
 इन्हें बनाने की लकड़ी भी
 हम  इन्हीं वृक्षों से पाते हैं
 यह वृक्ष हमारे  जीवन के लिए
  बच्चों एक वरदान हैं
 वन संपदा को बचाने का
 हम सब मिलकर जतन करें
 आओ हम सब मिलकर
 धरती माँ का श्रृंगार करें
फल फूलों के वृक्ष लगाकर
  बागों को सजाएँगे
फल खाकर के हम सब बच्चों
 स्वास्थ्य अपना बनाएँगे
 फलों  का उत्पादन करके
 हम रोजगार बढ़ाएँगे
 हमारे परिवारों के  संग
  कुछ परिवार और पल जाएँगे
 जड़ी बूटियों को
  लगाकर हम तो
 स्वास्थ्य लाभ ले पाएँगे
 आयुर्वेद का लाभ प्राप्त करें हम
  अब नई सोच को अपनाएँ
  आओ हम सब मिलकर
 धरती माँ का श्रृंगार करें।

रचयिता 
दीपा कर्नाटक,
प्रभारी प्रधानाध्यापिका,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय छतौला,
विकास खण्ड-रामगढ़,
जनपद-नैनीताल,
उत्तराखण्ड।

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