अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस

कर बुलन्द आवाज इतनी
कि अन्याय न सहेंगे,
न्याय पाना मौलिक अधिकार है
इसे पाकर ही दम लेंगे

समान न्याय व्यवस्था का
प्रत्येक को लाभ मिले,
पीड़ित को न्याय
अपराधी को सजा मिले।

एकजुट होकर लड़ना है
उन अपराधों के विरुद्ध
जो मानवता के खिलाफ,
सुसमाज निर्माण में हैं अवरुद्ध।

लोकतंत्र की रक्षा हेतु
जागरूकता फैलाएँ,
न्याय दिवस की सार्थकता
साकार बनाएँ।

रचयिता
मंजू गुसांईं,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवासीय प्राथमिक विद्यालय थराली,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,

  1. उत्तराखण्ड।


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