चिड़िया रानी
चूँ चूँ करके आई चिड़िया
लगता है बतिआई चिड़िया
रख मुंडेर में एक घोंसला
अण्डे दो रख आई चिड़िया
पंख पसारे रैन सकारे
भोर हो या हो अंधियारे
रक्षा करती भूख साधकर
निकले दो चूजे हैं प्यारे
चीं चीं चीं चीं करते रहते
दुबक-दुबक कर सहमे रहते
माँ की चोंच से खाना खाते
कोपल जैसे पंख आ रहे
थोड़ा-थोड़ा फुदक पा रहे
माँ अब उड़ना सिखलाएगी
आसमान तक ले जाएगी
नभ विशाल है वो घबराएँ
वापस कोटर में छुप जाएँ
माँ ने उड़कर उन्हें दिखाया
हिम्मत और हौंसला आया
हम भी ऊपर उड़ सकते हैं
आसमान को छू सकते हैं।
रचयिता
रीता गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कलेक्टर पुरवा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।
लगता है बतिआई चिड़िया
रख मुंडेर में एक घोंसला
अण्डे दो रख आई चिड़िया
पंख पसारे रैन सकारे
भोर हो या हो अंधियारे
रक्षा करती भूख साधकर
निकले दो चूजे हैं प्यारे
चीं चीं चीं चीं करते रहते
दुबक-दुबक कर सहमे रहते
माँ की चोंच से खाना खाते
कोपल जैसे पंख आ रहे
थोड़ा-थोड़ा फुदक पा रहे
माँ अब उड़ना सिखलाएगी
आसमान तक ले जाएगी
नभ विशाल है वो घबराएँ
वापस कोटर में छुप जाएँ
माँ ने उड़कर उन्हें दिखाया
हिम्मत और हौंसला आया
हम भी ऊपर उड़ सकते हैं
आसमान को छू सकते हैं।
रचयिता
रीता गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कलेक्टर पुरवा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।

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