मिशन प्रेरणा के अंग

तीन हस्तपुस्तिकाओं के संग
आओ, बदलें पढ़ाई का ढंग
छात्रों व स्वयं का विकास करें हम
शिक्षण में नवाचार करें हम
हस्तपुस्तिकाओं का प्रयोग करें अब
शिक्षक का हथियार हैं ये
शिक्षक को उपहार हैं ये
आओ जानें इनके कारज
शिक्षण के उद्देश्य हों सार्थक
प्रथम हस्तपुस्तिका है आधारशिला
भाग हैं इसके छह
प्रारंभिक स्तर पे मज़बूत नींव होय
फिर हिला न पाए कोय
भाषा और गणित की समझ हो विकसित
शिक्षण हो प्रभावी रुचिकर, बालकेन्द्रित
लर्निंग आउटकम की अवधारणा को जानो
इसकी आवश्यकता पहचानो
नवीन गतिविधियों का प्रयोग करो
फिर छात्रों का करके आँकलन
तुम शैक्षिक बदलाव करो
छात्रों के व्यक्तित्व को बदलो
भावी जीवन उन्नत बनाओ
अधिगम स्तर उच्चतर ले आओ
नवीन स्फूर्ति से प्रयास करो तुम
नवीन सृजन प्रारम्भ करो तुम

द्वितीय हस्तपुस्तिका है ध्यानाकर्षण
शिक्षण में छात्रों की रुचि बढ़ाये
ध्यानाकर्षण ध्यान धराये
शिक्षक तुम भी ध्यान धरो
कुछ तकनीकों का प्रयोग करो
जानो, अठ्ठारह तकनीकें हैं इसमें
व भाग हैं इसके चार
उपयोग करो तुम इनका
और कर लो इनमें विश्वास
विश्वास करो फिर विकास करो
उच्च अधिगम स्तर को प्राप्त करो
प्रातः कालांश में प्रेरणा जगाओ
फिर उपचारात्मक शिक्षण करवाओ
अधिगम स्तर उच्चत्तर ले जाओ

तीसरी हस्तपुस्तिका है शिक्षण संग्रह
एक शिक्षक की आवयश्कता व
व्यावसायिक विकास का ग्रह
शिक्षण योजना को जीवन में उतारना है
कक्षा अनुरूप दक्षता को बढ़ाना है
अब ये है नव शिक्षण की सूरत
ये तीनों हैं एक दूसरे की पूरक

रचयिता
अंशु सिंह,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भिक्कनपुर,
विकास खण्ड-रजापुर,
जनपद-गाजियाबाद।

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