आओ हरेला पर्व मनाएँ
आओ हरेला पर्व मनाएँ
सावन माह मेघ है बरसे,
फिर मिट्टी से खुशबू आयी,
इस अवसर का लाभ उठाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
फूल पौधों से भर दें धरती,
जो सबके मन को है हरती,
वृक्ष लता अनेक लगाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
मेघराज से गर्जन आयी,
वर्षा ऋतु ने आवाज़ लगायी,
हम भी अपना फर्ज निभाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
इतिश्री यहीं न करना भाई,
निराई, गुड़ाई और धूप छाँव की,
देख रेख में ध्यान लगाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
धरती को फिर स्वर्ग बनाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
रचयिता
लक्ष्मी देवी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मांडूवाला,
विकास खण्ड-सहसपुर,
जनपद-देहरादून,
उत्तराखण्ड।
सावन माह मेघ है बरसे,
फिर मिट्टी से खुशबू आयी,
इस अवसर का लाभ उठाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
फूल पौधों से भर दें धरती,
जो सबके मन को है हरती,
वृक्ष लता अनेक लगाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
मेघराज से गर्जन आयी,
वर्षा ऋतु ने आवाज़ लगायी,
हम भी अपना फर्ज निभाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
इतिश्री यहीं न करना भाई,
निराई, गुड़ाई और धूप छाँव की,
देख रेख में ध्यान लगाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
धरती को फिर स्वर्ग बनाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ,
आओ हरेला पर्व मनाएँ।
रचयिता
लक्ष्मी देवी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय मांडूवाला,
विकास खण्ड-सहसपुर,
जनपद-देहरादून,
उत्तराखण्ड।

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