समय का पैगाम

 करे ना कभी प्रतीक्षा, ना करे कभी विश्राम।
नित पथ पर तुम बढ़ते जाना, समय का यही पैगाम।।

साथ समय के यदि चलोगे तो आगे बढ़ पाओगे।
अलसाकर जो बैठ गये तो मन ही मन पछताओगे।
लक्ष्य मिलेगा तभी तुम्हें जब चलोगे तुम अविराम।
नित पथ पर तुम बढ़ते जाना, समय का यही पैगाम।।

शशक के जैसे दौड़-दौड़कर नहीं करना आराम।
कच्छप जैसी चाल से चलकर, विजय पे लिख दो नाम।
बढ़ते जाना सदा निरन्तर, सुबह हो या शाम।
नित पथ पर तुम बढ़ते जाना, समय का यही पैगाम।।

प्यारे बच्चों मत भूलो तुम, समय की महिमा महान।
आलस छोड़ो लक्ष्य साध लो, बनो देश की शान।
समय चक्र के भाल पे लिख दो, अपने उज्ज्वल काम।
नित पथ पर तुम बढ़ते जाना, समय का यही पैगाम।

रचयिता
डाॅ० सुधा सिरोही,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय नगला सालार प्रथम,
विकास क्षेत्र- कुन्दरकी,
जनपद- मुरादाबाद।

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