प्यारे बच्चों

प्यारे बच्चों!
आओ मिलकर,
नई उड़ानें भरते हैं।
चंदामामा, परी कथा से
आगे और निकलते हैं।
महामारी से डटकर लड़ना
घर में रहकर भी है पढ़ना।
पढ़कर तुमको
अच्छा बनकर
सूरज जैसे दमकना है।
खेल-खेल में
सीख समझकर
एकलव्य सा बनते हैं।
अपने मन की
मजबूती से
हालातों से लड़ते हैं।
प्यारे बच्चों!
आओ मिलकर
नई उड़ानें भरते हैं।
गिनतारा से सीख
के गिनती
हिसाब-किताब लगाएँगे।
कलरव से
किलकारी लेकर
कविता भी हम गाएँगे।
अपने आसपास की बातें
हमारा परिवेश में पाएँगे।
संस्कृत को पढ़कर अपनी
संस्कृति भी बचाएँगे।
अंग्रेजी का ज्ञानार्जन कर
विश्व पटल पर छाएँगे।
प्यारे बच्चों!
पढ़ने से ही
नए रास्ते बनते हैं।
जिसने कर ली
आज पढ़ाई
कल फिर वही चमकते हैं।
प्यारे बच्चों!
 आओ मिलकर
नई उड़ानें भरते हैं।
चंदा मामा परीकथा से
आगे और निकलते हैं।

रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या, 
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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