हरेला लोक त्योहार

बीज अनाज के
सात तरह के
प्रतीक हैं ये
सात जन्मों के,
टोकरी रिंगाल की
ले खेत का वेश
मिथुन राशि से
जब कर्क राशि में
सूर्य देव करें प्रवेश,
पहाड़ी परंपरा का
अनूठा संगम
प्रकति प्रेम का
अनोखा बन्धन,
वर्ष में तीन बार
आये हरेला
चैत्र मास प्रथम
दूजा श्रावण
तीसरा आख़िरी
अश्विन मास मनाएँ,
मास श्रावण में
नौ दिन पूर्व सावन से
आषाढ़ में बोया
हरेला जाए,
प्रिय शंकर को
मास ये सावन
प्रतिदिन भोर में
सींचे जल पावन,
पाती की टहनी
नवें करें गुड़ाई
दसवें दिन हरेला
काटा जाए
विधि अनुसार पूजन करते
बुजुर्ग हरेला
देवों को चढ़ाये
सुख, शांति, समृद्धि
हरेला लेकर आये,
नवजीवन औऱ विकास का
सूचक अच्छी फसल का
ये लोक त्योहार
अद्भुत परम्परा का
है संबंध उर्वरता का
लिया अब रूप
व्यापकता का
पौधरोपण अभियान का,
अब एक पेड़ नहीं
जंगल है पनपाना
प्रकृति के हर उपकार का
हम सबको कर्ज चुकाना
जल, थल, वायु
समूची पृथ्वी
मिलकर स्वर्ग इन्हें बनाना।

रचयिता
जया चौधरी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय बलखिला मलारी,
विकास खण्ड-जोशीमठ,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews