पढ़ना और जानना
विद्यालय से पहले,
बच्चा घर में शिक्षा लेता है,
मात पिता भाई बहनों के,
स्वर मन में भर लेता है।
जब आयी विद्यालय की बारी,
पढ़ने की होती तैयारी
अक्षर ज्ञान, स्वर की पहचान,
गिनती, सवाल लगता भारी।
अभ्यास कार्य करते-करते,
जब थक जाते नन्हें मुन्ने
सो जाते और खो जाते,
लगते अपने सपनों को बुनने।
देकर तमाम परीक्षाएँ,
होते सफ़ल पढ़ाई में,
फिर झोंक देते ख़ुद को,
जीवन की कठिन लड़ाई में।
फिर आती असल परीक्षाएँ,
कदम-कदम पे बिना बताये,
क्या करना, कैसे करना है?
कौन उन्हें अब समझाये?
मत अभिलाषा की पींग बढ़ाओ,
पौड़ी-पौड़ी चढ़ते जाओ,
गिर जाओ अगर ठोकर खाकर,
फिर उठो और बढ़ते जाओ।
पाया मैंने अब तक अनुभव,
जो हार गया और लड़ा नहीं,
जाता ज़रूर था विद्यालय,
लेकिन अब तक वह पढ़ा नहीं।
रचयिता
अंजली शर्मा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय फ़तेहपुर भादों,
विकास खण्ड-मुज़फ़्फ़राबाद
जनपद-सहारनपुर।
बच्चा घर में शिक्षा लेता है,
मात पिता भाई बहनों के,
स्वर मन में भर लेता है।
जब आयी विद्यालय की बारी,
पढ़ने की होती तैयारी
अक्षर ज्ञान, स्वर की पहचान,
गिनती, सवाल लगता भारी।
अभ्यास कार्य करते-करते,
जब थक जाते नन्हें मुन्ने
सो जाते और खो जाते,
लगते अपने सपनों को बुनने।
देकर तमाम परीक्षाएँ,
होते सफ़ल पढ़ाई में,
फिर झोंक देते ख़ुद को,
जीवन की कठिन लड़ाई में।
फिर आती असल परीक्षाएँ,
कदम-कदम पे बिना बताये,
क्या करना, कैसे करना है?
कौन उन्हें अब समझाये?
मत अभिलाषा की पींग बढ़ाओ,
पौड़ी-पौड़ी चढ़ते जाओ,
गिर जाओ अगर ठोकर खाकर,
फिर उठो और बढ़ते जाओ।
पाया मैंने अब तक अनुभव,
जो हार गया और लड़ा नहीं,
जाता ज़रूर था विद्यालय,
लेकिन अब तक वह पढ़ा नहीं।
रचयिता
अंजली शर्मा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय फ़तेहपुर भादों,
विकास खण्ड-मुज़फ़्फ़राबाद
जनपद-सहारनपुर।

Achchi rachna.. Congratulations
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