हरेला महोत्सव

चली हरेला पर्व की बयार,
उत्तराखंड में मिलकर चलाएँगे,
घर, आँगन, विद्यालय मोहल्ले से,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाएँगे।

स्वच्छ हो उत्तराखण्ड हमारा,
चहचहाती रहें यहाँ पक्षियाँ,
वनों की करें हम आग से रक्षा,
कभी न हो वनों को यहाँ खतरा।

उत्तराखंड को आगे बढ़ाएँगे,
चारों ओर हरियाली फैलाएँगे,
खेत, खलिहान, पहाड़, मैदान से,
वसुधा को श्रृंगार से सजाएँगे

पेड़, पौधों से लहलहाती वसुधा,
हवा, पानी का न कभी अंत हो,
जल स्रोतों की जल धार बढ़ाकर,
नदी, नालों कि प्यास बुझाएँगे।

लहलहाती रहे फल, फूलों से धरती,
बारह माह जहाँ हो हरियाली,
खुशनुमा मौसम यहाँ का हो,
ऐसा पर्यावरण संकल्प हमारा हो।।

रचयिता
सुधीर डोबरियाल,
सहायक अध्यापक,
रा. प्रा. वि.-मरगाँव,
विकास क्षेत्र-कल्जीखाल,
जनपद-पौड़ी गढवाल,
उत्तराखण्ड।

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