सूना सा है आँगन
मार्च, अप्रैल, मई और जून
के बाद जुलाई आई,
विद्यालय के आँगन में
फिर भी मायूसी छाई,
मुरझाया सा हर एक कमरा
सूना सा है आँगन,
यहीं चहकते बच्चे अपने
यहीं महकता बचपन,
टनटन की आवाज पे सारे
दौड़ लगाते एकदम,
एक स्वर और एक राग में
करें प्रार्थना वन्दन
एक गणवेश में खिले कमल से
लेते सबको मोह,
दुखी बहुत करता है बच्चों
तुमसे यह विछोह।
साथ तुम्हारे हम भी
बच्चे बन करके जी लेते हैं
मुस्काते जब तुम हो
हम भी दुख अपने सी लेते हैं
यही प्रार्थना है ईश्वर से
कर दो अब सब ठीक
हाथ उठाये माँग रहे हैं
दाता तुझसे भीख।।
रचयिता
दीपा गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय बराखेमपुर,
विकास क्षेत्र- बक्शी का तालाब,
जनपद-लखनऊ।
के बाद जुलाई आई,
विद्यालय के आँगन में
फिर भी मायूसी छाई,
मुरझाया सा हर एक कमरा
सूना सा है आँगन,
यहीं चहकते बच्चे अपने
यहीं महकता बचपन,
टनटन की आवाज पे सारे
दौड़ लगाते एकदम,
एक स्वर और एक राग में
करें प्रार्थना वन्दन
एक गणवेश में खिले कमल से
लेते सबको मोह,
दुखी बहुत करता है बच्चों
तुमसे यह विछोह।
साथ तुम्हारे हम भी
बच्चे बन करके जी लेते हैं
मुस्काते जब तुम हो
हम भी दुख अपने सी लेते हैं
यही प्रार्थना है ईश्वर से
कर दो अब सब ठीक
हाथ उठाये माँग रहे हैं
दाता तुझसे भीख।।
रचयिता
दीपा गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय बराखेमपुर,
विकास क्षेत्र- बक्शी का तालाब,
जनपद-लखनऊ।

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