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जाके रतनपुर गौरी बाजार में
नाम लिखाइब हो।
ए पापा अब हमहूँ पढ़ब
बकरी नाहिं चराईब हो।।
उहाँ मिलेला भोजन अच्छा
मिलेला कपड़ा अच्छा हो,
खूब पढ़ाई होला उहवाँ
कहेला बच्चा-बच्चा हो।
अपनी छोटकी बहिनियों के हम
साथ ले जाइब हो,
ए पापा अब हमहूँ पढ़ब
बकरी नाहिं चराईब हो।।
हमरे साथ के लड़िका सगरो
पढ़े जालन ए पापा,
सरकारी स्कूल में सब कुछ
फिरी में बाँटे ए पापा।
पढ़ि -लिखि के हम देश-विदेश में
नाम कमाईब हो,
ए पापा अब हमहूँ पढ़ब
बकरी नाहिं चराईब हो।।
धनी- गरीब में भेद ना होला
ओह स्कूल में ए पापा,
सर और मैडम सब बच्चन के
प्रेम करेलें ए पापा।
राकेश तिवारी सर से हमहूँ
पढ़े जाईब हो,
ए पापा अब हमहूँ पढ़ब
बकरी नाहिं चराईब हो।
जाके रतनपुर गौरी बाजार में
नाम लिखाइब हो,
ए पापा अब हमहूँ पढ़ब
बकरी नाहिं चराईब हो।।

रचयिता
राकेश कुमार तिवारी,
सहायक अध्यापक विज्ञान,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय रतनपुर,
विकास खण्ड-गौरी बाजार,
जिला-देवरिया।

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