प्रदूषण

आज साँस ज़हरीली है,
धुंध फ़िज़ा में फैली है,

नन्हें-मुन्नों की जान पर
आफत बन कर आयी है,
बुजुर्गों की सेहत पर भी
संकट की घड़ी छायी है।

मास्क पहनकर बाहर निकलें,
ये तो वैज्ञानिक ज्ञान है।
पर दो-चार पेड़ लगा दें कहीं,
तो महसूस होता अपमान है।

आज सबको याद आ रहा
कैसे कम करें प्रदूषण?
रोज़ यही सब करते हैं
संसाधनों का मनचाहा दूषण।

संकट आने पर क्या कोई
महामारी से बच सकता है?
पर प्रकृति की सुरक्षा से ये
अब भी संभव बन सकता है।

आओ मिलकर शपथ ये लें
कि प्रकृति का करेंगें संरक्षण।
तभी धरा पर बच सकता है
मेरा और तुम्हारा जीवन।।

रचयिता
ज्योति चौधरी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय इस्लामनगर
विकास खण्ड-मुरादाबाद,
जनपद-मुरादाबाद।

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