अतिसार नहीं उपचार चाहिए
उचित है कि सैद्धान्तिक से प्रयोगात्मक कहीं बेहतर होता है।
यह भी गलत नहीं कि बिन सैद्धान्तिक, प्रयोग सफल नहीं होता है।।
कैसे कहूँ गत वर्षों में प्रशासन कुछ चमत्कार ही खोज रहे हैं।
इसलिए बिन विश्लेषण व निष्कर्ष के प्रयोग ही प्रयोग हो रहे हैं।।
हो आयुर्वेदिक या ऐलोपैथिक दवा देने के बाद कुछ इंतजार चाहिए।
दवा देते रहने से कहीं अतिसार का शिकार न होना चाहिए।।
माना कि, कार्य क्षमता बढ़ाने हेतु प्रयोग आवश्यक होता है।
उचित है कि सैद्धान्तिक से-------------1
सिद्धांत है कि नवीन आविष्कार से पूर्व वास्तविक समस्या की खोज होनी चाहिए।
खोज होने पर प्रयोग से पूर्व, प्रयोगशाला में उपकरण की व्यवस्था कर लेनी चाहिए।।
तब निश्चित ही अपेक्षानुरूप परिणाम मिलेंगे।
फिर लर्निंग आउटकम के देख परिणाम सभी के हृदय खिलेंगे।।
समस्या का निस्तारण हमेशा विश्वास करने पर ही होता है।
उचित है कि सैद्धान्तिक--------------2
इतिहास गवाह है कि, पढ़े-लिखे के साथ गुनना भी जरूरी है।
गर हो अतिश्योक्ति स्वयं को, तब झेलना सबकी मजबूरी है।।
ये गुरुजन कर्मठ हैं, सुयोग्य हैं; इन्हें तो बस प्यार के दो बोल को चाहिए।
हो जाएँगे बच्चों पर कुर्बान ये सब, इन्हें स्कूल में मात्र बच्चा चाहिए।।
क्या कोई बतलाएगा, अभिभावक का भी बच्चे के प्रति दायित्व होता है।
उचित है कि सैद्धान्तिक--------------3
रचयिता
नरेन्द्र सैंगर,
सह समन्वयक,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।
यह भी गलत नहीं कि बिन सैद्धान्तिक, प्रयोग सफल नहीं होता है।।
कैसे कहूँ गत वर्षों में प्रशासन कुछ चमत्कार ही खोज रहे हैं।
इसलिए बिन विश्लेषण व निष्कर्ष के प्रयोग ही प्रयोग हो रहे हैं।।
हो आयुर्वेदिक या ऐलोपैथिक दवा देने के बाद कुछ इंतजार चाहिए।
दवा देते रहने से कहीं अतिसार का शिकार न होना चाहिए।।
माना कि, कार्य क्षमता बढ़ाने हेतु प्रयोग आवश्यक होता है।
उचित है कि सैद्धान्तिक से-------------1
सिद्धांत है कि नवीन आविष्कार से पूर्व वास्तविक समस्या की खोज होनी चाहिए।
खोज होने पर प्रयोग से पूर्व, प्रयोगशाला में उपकरण की व्यवस्था कर लेनी चाहिए।।
तब निश्चित ही अपेक्षानुरूप परिणाम मिलेंगे।
फिर लर्निंग आउटकम के देख परिणाम सभी के हृदय खिलेंगे।।
समस्या का निस्तारण हमेशा विश्वास करने पर ही होता है।
उचित है कि सैद्धान्तिक--------------2
इतिहास गवाह है कि, पढ़े-लिखे के साथ गुनना भी जरूरी है।
गर हो अतिश्योक्ति स्वयं को, तब झेलना सबकी मजबूरी है।।
ये गुरुजन कर्मठ हैं, सुयोग्य हैं; इन्हें तो बस प्यार के दो बोल को चाहिए।
हो जाएँगे बच्चों पर कुर्बान ये सब, इन्हें स्कूल में मात्र बच्चा चाहिए।।
क्या कोई बतलाएगा, अभिभावक का भी बच्चे के प्रति दायित्व होता है।
उचित है कि सैद्धान्तिक--------------3
रचयिता
नरेन्द्र सैंगर,
सह समन्वयक,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।

Comments
Post a Comment