सब हैं भारत की सन्तान

भारत की शोभा हैं शिक्षक, छात्र और किसान,
इन के सुख चैन में सारे देश का है कल्याण।
सब हैं भारत की सन्तान सब हैं भारत की सन्तान।
देश के ये मतवाले पाएँ जीवन का सुख चैन,
जीवन की हर कठिनाई को कर दें यह आसान।
सब हैं भारत की सन्तान सब हैं भारत की सन्तान।।
निर्बल और मज़दूरों को सब अपने गले लगाकर,
देश के यह बलवान सिपाही देश पर हैं कु़रबान।
सब हैं भारत की सन्तान, सब हैं भारत की सन्तान।।
भारत माँ का लाल कोई क्यों कष्ट उठाने पाए,
इन के हर सुख चैन की ख़ातिर हम दें जीवन दान।
सब हैं भारत की सन्तान सब हैं भारत की सन्तान।।
पिछड़े और कमज़ोर वर्ग भी हैं देश के लाल,
सोना चाँदी हीरे मोती सब इन पर कु़रबान।
सब हैं भारत की सन्तान सब हैं भारत की सन्तान।।
अपने सारे देश के धन का ऐसा हो उपयोग,
भूखा, नंगा और बेघर अब कोई न हो इन्सान।
सब हैं भारत की सन्तान सब हैं भारत की सन्तान।।

रचयिता
रेहाना शमीम,
प्राथमिक विद्यालय बूढ़ाडीह -2,
विकास खण्ड-भटहट,
जनपद-गोरखपुर।

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