प्रेम
शक्कर में मिठास होती है यारों
पर जब लब्ज़ों की मिठास
घुल जाए जुबां में
मिठास बन जाए दवा
दूर कर दे सब दर्द यारों
है दोनों में ही मिठास
पर एक है दर्द
तो दूसरी है दवा
शक्कर दे देती है दर्द
लब्ज़ बन जाते हैं दवा
है न कुदरत का करिश्मा यारों
शक्कर जब बन जाए चाशनी
लपेट ले गुलाबजामुन को इस कदर
लाख कोशिश कर लें हम
अलग न हो सकें गुलाबजामुन और चाशनी
घुल जाए जुबां में मिठास इतनी
दूर न हो सकें हम आपसे कभी
संचार हो मीठी तरंगों का जहां में
ऐ खुदा है आपसे विनती यही
आ जाए मिठास पानी में
पर दिखें न दाने पानी में
हो जुबां भी सफेद
घुल जाएँ प्रेम के छोटे-छोटे लब्ज़
बन जाएँ जुबां मीठी
दिखे न रंग और धर्म में अन्तर
गूँजे एक ही स्वर जहां में
प्रेम में ही जीवन
प्रेम ही जीवन
शक्कर में भी मिठास होती है यारों।
रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।
पर जब लब्ज़ों की मिठास
घुल जाए जुबां में
मिठास बन जाए दवा
दूर कर दे सब दर्द यारों
है दोनों में ही मिठास
पर एक है दर्द
तो दूसरी है दवा
शक्कर दे देती है दर्द
लब्ज़ बन जाते हैं दवा
है न कुदरत का करिश्मा यारों
शक्कर जब बन जाए चाशनी
लपेट ले गुलाबजामुन को इस कदर
लाख कोशिश कर लें हम
अलग न हो सकें गुलाबजामुन और चाशनी
घुल जाए जुबां में मिठास इतनी
दूर न हो सकें हम आपसे कभी
संचार हो मीठी तरंगों का जहां में
ऐ खुदा है आपसे विनती यही
छोटे-छोटे सफेद-सफेद दानेघुल जाएँ जब पानी में
आ जाए मिठास पानी में
पर दिखें न दाने पानी में
हो जुबां भी सफेद
घुल जाएँ प्रेम के छोटे-छोटे लब्ज़
बन जाएँ जुबां मीठी
दिखे न रंग और धर्म में अन्तर
गूँजे एक ही स्वर जहां में
प्रेम में ही जीवन
प्रेम ही जीवन
शक्कर में भी मिठास होती है यारों।
रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।

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