परिवर्तन

बदल रही है जिंदगी
बदल रहा है वक्त
हो रहा है परिवर्तन
साथ में हम भी रहे बदल
उस समय के साथ
आगे बढ़ने की होड़ में
छूट रहा है पीछे कुछ हमारा
समय नहीं रुकने का
कल को अगर कभी रुके तो
एक न एक दिन जरूर पीछे मुड़ेंगे
एक सपने की तरह
उन बीती हुई यादों को देखेंगे
एक अमुक दर्शक बनकर
वही धूप, वही छाँव
वही दिन, वही रात
पर हम वही नहीं रहेंगे
आज दूसरे नए होंगे हमारे जगह
और हमारी जगह एक सूनी पड़ी साँस में होगी
गालों पर पड़ी झुर्रियों पर होंगी
फिर जरूर सोचेंगे कि
काश ठहर गया होता वो वक्त
पर क्या हम उस वक्त में ठहरे थे?

रचयिता
आराधना कुशवाहा,
सहायक अध्यापक, 
प्राथमिक विद्यालय मोहरगंज, 
विकास खण्ड-चहनियां, 
जनपद-चन्दौली।

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