शब्द
ये शब्द, शब्द नहीं।
बीज हैं क्रान्ति के, शांति के।
इनमें निहित है शक्ति,
इनमें अतुल है शक्ति।
कभी गीता बन जाते हैं,
कभी वेद की दिव्य वाणी।
बुद्ध की, महावीर की,
अभिव्यक्त हो अध्यात्म वाणी।
इन्हीं के माध्यम से,
प्रेरणा पाता प्राणी।
सुकरात ने भी शब्दों से,
बनाया एक दर्शन।
अरस्तू ने व्यक्त की थी,
परिभाषा एक नूतन।
शब्द ही इतिहास बनाते हैं,
शब्द ही इतिहास बताते हैं।
कभी द्रोपदी के कटुवचन,
शिशुपाल के दुर्वचन।
प्रचण्ड महाभारत रचाते हैं।
शब्द की संवेदना उतर,
हलचल करती अन्तर।
झकझोरती मानस।
शब्द से पीड़ा, शब्द से रस।
शब्द ही उर बेधता है,
शब्द ही उर बाँधता है।
शब्द से बनते शब्द,
शब्द से चर्चा विशद।
शब्द निर्बल प्राण को,
उत्साह से भर देता।
शब्द ही जीवन का सृजेता,
कभी कटुता के बीज,
एक क्षण में बोता।
अद्भुत, अतुलनीय है,
शब्द अनिवर्चनीय है।
तनिक, मन प्राण से,
आओ विचारें।
शब्द की महिमा,
शब्द की गरिमा।
बीज हैं क्रान्ति के, शांति के।
इनमें निहित है शक्ति,
इनमें अतुल है शक्ति।
कभी गीता बन जाते हैं,
कभी वेद की दिव्य वाणी।
बुद्ध की, महावीर की,
अभिव्यक्त हो अध्यात्म वाणी।
इन्हीं के माध्यम से,
प्रेरणा पाता प्राणी।
सुकरात ने भी शब्दों से,
बनाया एक दर्शन।
अरस्तू ने व्यक्त की थी,
परिभाषा एक नूतन।
शब्द ही इतिहास बनाते हैं,
शब्द ही इतिहास बताते हैं।
कभी द्रोपदी के कटुवचन,
शिशुपाल के दुर्वचन।
प्रचण्ड महाभारत रचाते हैं।
शब्द की संवेदना उतर,
हलचल करती अन्तर।
झकझोरती मानस।
शब्द से पीड़ा, शब्द से रस।
शब्द ही उर बेधता है,
शब्द ही उर बाँधता है।
शब्द से बनते शब्द,
शब्द से चर्चा विशद।
शब्द निर्बल प्राण को,
उत्साह से भर देता।
शब्द ही जीवन का सृजेता,
कभी कटुता के बीज,
एक क्षण में बोता।
अद्भुत, अतुलनीय है,
शब्द अनिवर्चनीय है।
तनिक, मन प्राण से,
आओ विचारें।
शब्द की महिमा,
शब्द की गरिमा।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।

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