मीना
आज मीना ने मन में ठानी है,
बेटियों में नयी चेतना जगानी है।
बेटा-बेटी में अंतर न करो,
प्यार और अपनेपन से इन्हें भी मौक़ा दो।।
जिसका दिल है सागर ममता का,
उसे अधिकार मिले समता का।
पूर्ण शिक्षा लेना है अत्याधिक जरूरी,
बीच में छोड़ना अब नहीं है कोई मजबूरी।।
सदियों से समझा गया जिसे अबला,
ज्ञान के द्वारा ही वह बन पाएगी सबला।
होकर शिक्षित बेटियाँ बनेंगी आत्मनिर्भर,
देश का चहुँमुखी विकास होगा निरंतर।।
रचयिता
लक्ष्मी वर्मा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय पपियापुर,
विकास खण्ड-बढ़पुर
जनपद-फर्रुखाबाद।
बेटियों में नयी चेतना जगानी है।
बेटा-बेटी में अंतर न करो,
प्यार और अपनेपन से इन्हें भी मौक़ा दो।।
जिसका दिल है सागर ममता का,
उसे अधिकार मिले समता का।
पूर्ण शिक्षा लेना है अत्याधिक जरूरी,
बीच में छोड़ना अब नहीं है कोई मजबूरी।।
सदियों से समझा गया जिसे अबला,
ज्ञान के द्वारा ही वह बन पाएगी सबला।
होकर शिक्षित बेटियाँ बनेंगी आत्मनिर्भर,
देश का चहुँमुखी विकास होगा निरंतर।।
रचयिता
लक्ष्मी वर्मा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय पपियापुर,
विकास खण्ड-बढ़पुर
जनपद-फर्रुखाबाद।

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