कल की उम्मीद

नन्हें-नन्हें हाथों ने जो,
अब कलम ये थामी है।

     उम्मीद जगी है आँखों में,
      हमें सफलता पानी है।

छोटे-छोटे कदम लगे जो,
मिलकर आगे बढ़ने।

      लो चले वो फिर एक और,
      नई  कहानी  गढ़ने।

मासूम सी आँखों में है,
सपने उज्जवल भविष्य के।

      लहराएँगे वो भी परचम,
       आसमां में  विश्व  के।

इन नन्हीं आँखों के स्वप्न,
साकार हमी को करने हैं।

        ज्ञान की रोशनी से भर दें,
         ये तो निर्मल झरने हैं।

विश्व पटल पर जो भारत के,
इतिहास को रचने वाले हैं।

        सौभाग्य हमारा कि हम ही उनको
        उत्तम साँचों में गढ़ने वाले हैं।
             
रचयिता
रंजना बहुगुणा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय नंदप्रयाग,
विकास खण्ड-नंदप्रयाग
जनपद-चमोली।

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