मेरा छाता
खूब रंग-रंगीला मेरा छाता,
सैर कराने बारिश में जाता।
इतना प्यारा, है इतना सुंदर,
जैसे लगता है नीला अम्बर।
तेज हवा में तनकर रहता,
कभी न झुकता मेरा छाता।
संग-संग चलता है यह मेरे,
चाहे धूप हो या बादल घनेरे।
जब लेकर इसे जाता हूँ बाहर,
बन जाता है यह छोटा सा घर।
भीगने से मुझे सदा ही बचाता,
चाहे खुद गीला हो जाए छाता।
सैर कराने बारिश में जाता।
इतना प्यारा, है इतना सुंदर,
जैसे लगता है नीला अम्बर।
तेज हवा में तनकर रहता,
कभी न झुकता मेरा छाता।
संग-संग चलता है यह मेरे,
चाहे धूप हो या बादल घनेरे।
जब लेकर इसे जाता हूँ बाहर,
बन जाता है यह छोटा सा घर।
भीगने से मुझे सदा ही बचाता,
चाहे खुद गीला हो जाए छाता।
रचयिता
नवनीत शुक्ल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैरवां द्वितीय,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।

Very nice
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