भिन्न की अवधारणा
आओ समझें
आज के दिन,
एक नया चैप्टर
नाम है भिन्न।
आओ पढें
भिन्न के किस्से,
भिन्न है-
पूर्ण वस्तु के बराबर हिस्से।
ले लो तुम एक रोटी
करके बराबर हिस्से चार,
माना एक हिस्सा खा गए तुम
तो खाया तुमने एक बटे चार।
एक बटे चार कहलाए
अंश बटे हर,
भिन्न है सरल बहुत
समझो हिस्से गिन-गिनकर।
रचयिता
मंजू गुसांईं,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवासीय प्राथमिक विद्यालय थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
आज के दिन,
एक नया चैप्टर
नाम है भिन्न।
आओ पढें
भिन्न के किस्से,
भिन्न है-
पूर्ण वस्तु के बराबर हिस्से।
ले लो तुम एक रोटी
करके बराबर हिस्से चार,
माना एक हिस्सा खा गए तुम
तो खाया तुमने एक बटे चार।
एक बटे चार कहलाए
अंश बटे हर,
भिन्न है सरल बहुत
समझो हिस्से गिन-गिनकर।
रचयिता
मंजू गुसांईं,
सहायक अध्यापक,
राजकीय आवासीय प्राथमिक विद्यालय थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

great 👌
ReplyDeleteवाह!!!!
ReplyDeleteGood
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