बादल

उमड़ -घुमड़ कर आए बादल।
                नभ में देखो छाए बादल।।

हवा के संग है उड़ता बादल।
                 कभी नहीं है रूकता बादल।।

कभी सफेद, कभी काला बादल।
                  देखो रंग बदलता बादल।।

पानी  खूब   बरसाए  बादल।
                  कभी आँख दिखाए बादल।।

कभी पहाड़ सा दिखता बादल।
                  कभी गायब हो जाए बादल।।

रचयिता 
कमलेश प्रसाद वर्मा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रिकेबीपुर,
विकास खण्ड-रामपुर,
जनपद-जौनपुर।

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