मन करता है
मन करता है
मन करता है
मैं फिर से बस्ता लेकर
अपने स्कूल में जाऊँ।
अपने संगी-साथियों के साथ मिलकर
माँ सरस्वती की वन्दना गाऊँ।
मन करता है
देशगान की धुन सुनाकर
राष्ट्रप्रेम की अलख जगाऊँ।
देश-विदेश की चर्चा कर
नित अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाऊँ।
मन करता है
सावधान की मुद्रा में राष्ट्रगान गाकर
अपने राष्ट्रप्रेम को झलकाऊँ।
माँ सरस्वती के मंदिर में खड़े होकर
जोर-जोर से 'जय हिन्द' का नारा लगाऊँ।
मन करता है
मैं अपने स्कूल में जाकर
अपने गुरूजनों को शीश नवाऊँ।
उनसे आशीर्वाद का प्रसाद पाकर
अपने घर-देश का मान बढ़ाऊँ।
मन करता है
मैं फिर से स्कूल जाकर
भोजन माता के हाथों मिड-डे-मील खाऊँ
भोजन पूर्व हाथ धोकर भोजन मंत्र बोलकर
अन्न माता का मान-सम्मान बढ़ाऊँ॥
मन करता है
मैं अपने स्कूल जाकर
अपनी बगिया के पेड़-पौधों को सींचूँ
उनको पल्लवित, पुष्पित, फलित देखकर
मन ही मन प्रफुल्लित होऊँ।
मन करता है
मैं अपने विद्यालय में जाकर
अपने स्कूल फील्ड में दौड़ लगाऊँ
साथियों के संग मिलकर
धमा चौकड़ी खूब मचाऊँ।
मन करता है
मैं अपने विद्यालय में जाकर
कब अपना होमवर्क गुरुजनों को दिखाऊँ।
गुरु ज्ञान की 'विमल' गंगा से सेनिटाईज होकर
विशुद्ध मानव बन मानवता की जोत जलाऊँ।
रचयिता
विमला रावत,
सहायक अध्यापक,
राजकीय जूनियर हाईस्कूल नैल गुजराड़ा,
विकास क्षेत्र-यमकेश्वर,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।
मन करता है
मैं फिर से बस्ता लेकर
अपने स्कूल में जाऊँ।
अपने संगी-साथियों के साथ मिलकर
माँ सरस्वती की वन्दना गाऊँ।
मन करता है
देशगान की धुन सुनाकर
राष्ट्रप्रेम की अलख जगाऊँ।
देश-विदेश की चर्चा कर
नित अपना सामान्य ज्ञान बढ़ाऊँ।
मन करता है
सावधान की मुद्रा में राष्ट्रगान गाकर
अपने राष्ट्रप्रेम को झलकाऊँ।
माँ सरस्वती के मंदिर में खड़े होकर
जोर-जोर से 'जय हिन्द' का नारा लगाऊँ।
मन करता है
मैं अपने स्कूल में जाकर
अपने गुरूजनों को शीश नवाऊँ।
उनसे आशीर्वाद का प्रसाद पाकर
अपने घर-देश का मान बढ़ाऊँ।
मन करता है
मैं फिर से स्कूल जाकर
भोजन माता के हाथों मिड-डे-मील खाऊँ
भोजन पूर्व हाथ धोकर भोजन मंत्र बोलकर
अन्न माता का मान-सम्मान बढ़ाऊँ॥
मन करता है
मैं अपने स्कूल जाकर
अपनी बगिया के पेड़-पौधों को सींचूँ
उनको पल्लवित, पुष्पित, फलित देखकर
मन ही मन प्रफुल्लित होऊँ।
मन करता है
मैं अपने विद्यालय में जाकर
अपने स्कूल फील्ड में दौड़ लगाऊँ
साथियों के संग मिलकर
धमा चौकड़ी खूब मचाऊँ।
मन करता है
मैं अपने विद्यालय में जाकर
कब अपना होमवर्क गुरुजनों को दिखाऊँ।
गुरु ज्ञान की 'विमल' गंगा से सेनिटाईज होकर
विशुद्ध मानव बन मानवता की जोत जलाऊँ।
रचयिता
विमला रावत,
सहायक अध्यापक,
राजकीय जूनियर हाईस्कूल नैल गुजराड़ा,
विकास क्षेत्र-यमकेश्वर,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

बेहतरीन रचना💐💐💐
ReplyDeleteबच्चों के सुंदर मनोभावों को अभिव्यक्त करती सार्थक कविता।
ReplyDeleteBahut hi achhi kavita ki panktiyan likhi hai. Humko bhi apna school ke din yaad aa rahe hain. Ishwr tume aur jyada likhne padhne ka gyan de.
ReplyDeleteVery nice 👏👏👏
ReplyDeleteबहुत प्रशंसनीय एवम् दिल को छूने वाली रचना
ReplyDeleteबहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, लेकिन जब आप और हम पढ़ते थे तो उस समय मिड डे मील नही था l मिड डे मील तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने 15 अगस्त 1995 को शुरू किया था और उस समय तक हमारी पढाई पूरी हो चुकी थी l
ReplyDeleteमैं फिर से स्कूल जाकर
भोजन माता के हाथों मिड-डे-मील खाऊँ
भोजन पूर्व हाथ धोकर भोजन मंत्र बोलकर
अन्न माता का मान-सम्मान बढ़ाऊँ॥