विलोम शब्द

विपरीत अर्थ करें प्रकट, कहलाते विपरीतार्थी।
वही कहलायें विलोम शब्द, वही कहलाते विपरीतार्थी।।

तत्सम का विलोम तद्भव, इतना लो तुम जान।
तद्भव का होता है तत्सम, कर लो इतना ज्ञान।।

अमृत का विलोम है विष, उदार का अनुदार।
कटु का विपरीत है मधुर, उपकार का अपकार।।

अल्पायु का विलोम दीर्घायु, रक्षक का होता भक्षक।
अज्ञ का विपरीत विज्ञ होता, निरर्थक का सार्थक।।

दयालु का विपरीत होता निर्दय, जय का पराजय।
क्रय का विलोम होता विक्रय, न्याय का अन्याय।।

घृणा का विलोम होता प्रेम, पाप का होता पुण्य।
आर्द्र का विपरीत होता शुष्क, आय का व्यय।।

योगी का विलोम होता भोगी, मनुष्यता का पशुता।
ज्ञानी का विलोम अज्ञानी होता, एकता का अनेकता।।

यश का विपरीत अपयश होता, सरस का नीरस।
दृश्य का विलोम होता अदृश्य, रात्रि का दिवस।।

उचित का विलोम अनुचित होता, खंडन का मंडन।
उग्र का विपरीत होता शांत, नूतन का पुरातन।।

विरोध का विपरीत समर्थन होता, उत्थान का पतन।
मान का विलोम होता अपमान, मोक्ष का बंधन।।

कठोर का विलोम होता कोमल, छल का निश्छल।
मलिन का विपरीत होता निर्मल, ठोस का तरल।।

अर्थ का विलोम अनर्थ होता, दुर्लभ का सुलभ।
उचित का विलोम अनुचित होता, शुभ का अशुभ।।

रचयिता
ऋतु सिंघल,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अंबेहटा चांद-1,
विकास खण्ड- रामपुर मनिहारान,
जनपद- सहारनपुर।

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