गुरुवर तुम्हें प्रणाम

प्रथम गुरु माता पिता,
उनको करूँ प्रथम प्रणाम।
गुरु सर्वज्ञ गुरु गुरु ही पूजा,
गुरु वंदनीय गुरु सा नहीं।
कोई सम दूजा
गुरु ज्ञान का  होता दीपक
ज्ञान की दीपक हरपल जलाएँ
रोशन कर देता है मन को
उजियाला फैलाये
अच्छे सच्चे का  पाठ पढ़ाते
अंधियारों को दूर भगाते
ऐसे गुरुवर तुम्हें प्रणाम।।

रचयिता
माधुरी पौराणिक,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हस्तिनापुर,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

Comments

Total Pageviews