नन्हा पथिक
भरकर मुस्कान,
लेकर हौसलों की उड़ान।
चल पड़ा नन्हा पथिक,
पाने मंजिलों का आसमान।
जीवन संघर्ष है,
यह रखना होगा भान,
पथ अगम्य, पभटकाव भरा,
कंटकों का भी हो ज्ञान,
न हो विचलित,
स्वयं पर रख विश्वास,
रख साहस अदम्य।
मंजिल को बना गम्य,
आलस्य को तू त्याग,
आंधियों से डिगना नहीं,
पथ बन जाएगा सुगम,
याद रखना यही।
अविराम समय का कर ध्यान,
भर कर हौंसलों की उड़ान।
विचलित नहीं होना होगा।
मिटा लक्ष्य की बाधाएँ,
प्रतिपल आगे बढ़ना होगा।
छोड़ सभी आराम,
परिश्रम को बना हथियार,
मिलेंगी नई मंजिलें,
हो जा तू तैयार,
अनायास मिलती नहीं मंजिल,
सदा रखना याद,
जब तक न पहुँचो चरम पर,
थकने की न हो बात,
भर मुस्कान लिए हौंसलों की उड़ान।
चल पड़ नन्हें पथिक,
पाने मंजिले ए आसमान,
पाने मंजिले ए आसमान।।
रचयिता
जानकी दानू,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय थनगीरा,
संकुल-कुराड़,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
लेकर हौसलों की उड़ान।
चल पड़ा नन्हा पथिक,
पाने मंजिलों का आसमान।
जीवन संघर्ष है,
यह रखना होगा भान,
पथ अगम्य, पभटकाव भरा,
कंटकों का भी हो ज्ञान,
न हो विचलित,
स्वयं पर रख विश्वास,
रख साहस अदम्य।
मंजिल को बना गम्य,
आलस्य को तू त्याग,
आंधियों से डिगना नहीं,
पथ बन जाएगा सुगम,
याद रखना यही।
अविराम समय का कर ध्यान,
भर कर हौंसलों की उड़ान।
विचलित नहीं होना होगा।
मिटा लक्ष्य की बाधाएँ,
प्रतिपल आगे बढ़ना होगा।
छोड़ सभी आराम,
परिश्रम को बना हथियार,
मिलेंगी नई मंजिलें,
हो जा तू तैयार,
अनायास मिलती नहीं मंजिल,
सदा रखना याद,
जब तक न पहुँचो चरम पर,
थकने की न हो बात,
भर मुस्कान लिए हौंसलों की उड़ान।
चल पड़ नन्हें पथिक,
पाने मंजिले ए आसमान,
पाने मंजिले ए आसमान।।
रचयिता
जानकी दानू,
सहायक अध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय थनगीरा,
संकुल-कुराड़,
विकास खण्ड-थराली,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

बेहतरीन👌👌👌👌💐
ReplyDeleteमिशन शिक्षण संवाद (विचार शक्त) में मेरी कविता को स्थान देने हेतु बहुत-बहुत धन्यवाद।
ReplyDeleteवाह!!!सुन्दर रचना
ReplyDeleteअनुपम ।
ReplyDeleteOutstanding
ReplyDeleteवाह ! बहुत सुन्दर रचना ,नमन
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