मेरा विद्यालय
चार महीने बीत चुके,
बन्द पड़े मेरे किताबों के पेज।
बड़े मनोरथ से जोड़े थे,
मैने हर कॉपी के, साल भर पेज।
परीक्षा का कौतूहल था मन में
आने वाला जो कुछ दिनों में था।
मेहनत से बनाया मेरा वो प्रोजेक्ट,
बड़े गर्व से जिसे जँचवाना था।
साल भर की बनी डायरी,
स्कूल के हर कार्य की गवाही।
ताक रही मुझे बस्ते से, कहती
क्यों अचानक मुझमे दिलचस्पी न दिखाती।
अभी-अभी तो हमने ईको क्लब,
था मिलकर सबने बनाया।
अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश,
पाँच तत्वों के नामों से था सजाया।
याद आ रहा मुझे मेरा विद्यालय,
हम सब बच्चों का है वो देवालय।
क्यों बन्द पड़ी हैं सब कक्षाएँ,
जहाँ होनी थीं तब परीक्षाएँ।
क्यारी के वो अधखिले फूल,
मायूसी से बन गए होंगे सब शूल।
विद्यालय का आँगन सूना,
घर में बैठकर मुझे आता रोना।
जुलाई माह की तारीख एक,
नया जोश नई ऊर्जा के संग।
खिल खिलाकर आते थे हम,
गर्मी की छुट्टी के अनुभव के संग।
महीने भर का काम मैम को बताते,
घर के छोटे-छोटे अनुभव साझा करते।
देशाटन की मीठी-मीठी बातें करते,
नानी के घर क्या-क्या खाया स्वाद बतलाते।
जहाँ हम से रौनक रहनी थी,
कोरेंटाइन सेंटर से बनी खामोशी।
मैम भी चुपचाप मुँह पर मास्क लगा जातीं,
बिन बोले, हालचाल पूछ वापस आतीं।
रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।
बन्द पड़े मेरे किताबों के पेज।
बड़े मनोरथ से जोड़े थे,
मैने हर कॉपी के, साल भर पेज।
परीक्षा का कौतूहल था मन में
आने वाला जो कुछ दिनों में था।
मेहनत से बनाया मेरा वो प्रोजेक्ट,
बड़े गर्व से जिसे जँचवाना था।
साल भर की बनी डायरी,
स्कूल के हर कार्य की गवाही।
ताक रही मुझे बस्ते से, कहती
क्यों अचानक मुझमे दिलचस्पी न दिखाती।
अभी-अभी तो हमने ईको क्लब,
था मिलकर सबने बनाया।
अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश,
पाँच तत्वों के नामों से था सजाया।
याद आ रहा मुझे मेरा विद्यालय,
हम सब बच्चों का है वो देवालय।
क्यों बन्द पड़ी हैं सब कक्षाएँ,
जहाँ होनी थीं तब परीक्षाएँ।
क्यारी के वो अधखिले फूल,
मायूसी से बन गए होंगे सब शूल।
विद्यालय का आँगन सूना,
घर में बैठकर मुझे आता रोना।
जुलाई माह की तारीख एक,
नया जोश नई ऊर्जा के संग।
खिल खिलाकर आते थे हम,
गर्मी की छुट्टी के अनुभव के संग।
महीने भर का काम मैम को बताते,
घर के छोटे-छोटे अनुभव साझा करते।
देशाटन की मीठी-मीठी बातें करते,
नानी के घर क्या-क्या खाया स्वाद बतलाते।
जहाँ हम से रौनक रहनी थी,
कोरेंटाइन सेंटर से बनी खामोशी।
मैम भी चुपचाप मुँह पर मास्क लगा जातीं,
बिन बोले, हालचाल पूछ वापस आतीं।
रचयिता
सन्नू नेगी,
सहायक अध्यापक,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सिदोली,
विकास खण्ड-कर्णप्रयाग,
जनपद-चमोली,
उत्तराखण्ड।

सुंदर दीदी👌👌👌
ReplyDeleteबहुत सुन्दर रचना दीदी, नमन ,,,,,,,,,,,,,,
ReplyDeleteवाह!!!सुन्दर रचना
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ReplyDeleteनमन आपके शब्द कोष को ।
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