शिक्षक

आने वाली बाधाओं से,
भला कहाँ वह डरता है।
शिक्षक बच्चों के सपनों में,
रंग अनोखे भरता है।।

रहती यही कामना उसकी,
ज्ञानवान हर शिष्य बने।
धर्म आदि को लेकर जग में,
मित्रो युद्ध कभी न ठने।।

जग में समरसता की यारों,
ज्योति प्रज्ज्वलित करता है।
शिक्षक बच्चों के सपनों में,
रंग अनोखे भरता है।।

ज्ञान प्रकाश सदा ही वह तो,
दुनिया में फैलाता है।
गुरु चरणों को जो पूजे वो,
जग में नाम कमाता है।।

सुनो अशिक्षा के तम को वह,
सूरज बनकर हरता है।
शिक्षक बच्चों के सपनों में,
रंग अनोखे भरता है।।

खेल-खेल में शिक्षा की वह,
सुन्दर अलख जगाता है।
नैतिकता की मित्रो सुन लो,
वीणा खूब बजाता है।।

क्षमता के अनुरूप सुनो वह,
पीड़ा सबकी हरता है।
शिक्षक बच्चों के सपनों में,
रंग अनोखे भरता है।।

रचयिता
प्रदीप कुमार चौहान,
प्रधानाध्यापक,
मॉडल प्राइमरी स्कूल कलाई,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।

Comments

  1. बहुत ही सुन्दर रचना सर

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