हिंदू नववर्ष:

आओ मिलकर हम नये साल का करें ऐसा स्वागत,
भावविभोर हो जनमानस, हो खुशियों की चाहत।

मन में हो प्रेम सभी के करें न बुरा कभी किसी का हम,
सीखें सदा साथ प्रेम से रहना बोले मीठी वाणी हम।

आओ मिलकर ले संकल्प करें दीन-दुखियों की सेवा हम,
सबके लिए मंगलमय हो हिंदू नववर्ष ऐसा कुछ करें हम।

आओ मिलकर नये साल का करें ऐसा स्वागत,
भावविभोर हो जनमानस, हो खुशियों की चाहत।

नये साल की नयी सुबह कुछ नया लिखने की बारी,
काश कुछ ऐसा लिख जाऊँ हर लूँ सबकी पीड़ा सारी।

लिखूँ मैं कुछ ऐसा की सबकी आस बन जाऊँ,
लिखते-लिखते एक दिन मैं ही कविता बन जाऊँ।

आओ मिलकर नये साल का करें ऐसा स्वागत,
भावविभोर हो जनमानस, हो खुशियों की चाहत।

नये वर्ष में मिल परिवार संग घर में ही रहिएगा,
 हो जाए खत्म "कोरोना" कुछ ऐसा जतन करिएगा।

लिखने में कोई गलती हो तो माफ कीजिएगा,
अगर कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिएगा।

आओ मिलकर नये साल का करें ऐसा स्वागत,
भावविभोर हो जनमानस, हो खुशियों की चाहत।

रचयिता
नवनीत शुक्ल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैरवां द्वितीय,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।

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