नए वर्ष का आगमन

दिवा का निशा से नमन हो रहा है,
नए वर्ष का आगमन हो रहा है,
दिन पे दिन माह से घट रहे हैं,
पुरा वर्ष का यूँ गमन हो रहा है,
 कभी कुछ है खोया कभी कुछ है पाया,
नव वर्ष में जग मगन हो रहा है,
चली जब अमन की पवन फिर कहीं से,
हर एक गुल गुलशन हो रहा है,
कहीं शोख कलरव हुआ पक्षियों का,
लगा कि क्षितिज का धरा से लगन हो रहा है,
 ढली जा रही है वह शाम गम की,
 देखो सफल हर स्वप्न हो रहा है,
तज के दिलों की कुछ दूरियों को,
 राग द्वेषों का कुछ दमन हो रहा है,
सुगंधित पवन में श्वसन हो रहा है,
नए वर्ष का यूँ आगमन हो रहा है।

रचयिता
अनुराधा दोहरे,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय नगरिया बुजुर्ग,
विकास खण्ड-महेवा,
जनपद-इटावा।

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