शून्य से शुरुआत

मैं राख हूँ
मैं ख़ाक हूँ
मैं हर किसी की बात हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।

मैं अंध हूँ
मैं अंधकार हूँ
मैं जुगनू की तलाश हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ
मैं दया हूँ
मैं पीड़ा हूँ
मैं भक्ति में कबीरा हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।

मैं आज हूँ
मैं कल हूँ
मैं ना मिले वह प्रतिफल हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।

मैं शिखर हूँ
मैं समुद्र हूँ
मैं हर पल वह निडर हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।।

मैं ज्ञान हूँ
मैं विज्ञान हूँ
मैं हर किसी की खोज हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।।

मैं राग हूँ
मैं द्वेष हूँ
मैं हर किसी का भेष हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।।

मैं आग हूँ
मैं त्याग हूँ
मै बेसुरो का साज हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।।

मैं आस हूँ
विश्वास हूँ
मैं बेखुदी की बात हूँ
मैं शून्य से शुरुआत हूँ।।

रचयिता 
गोपाल प्रसाद सिंह,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कैमावली,
विकास खण्ड-इगलास,
जनपद-अलीगढ़।

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