जय माता दी

हे माँ, करूँ नित तेरी पूजा
तुझ- सा नहीं कोई  दूजा।
माँ दुर्गा तू नौ  स्वरूपा
तेरी महिमा अनन्त अनूपा।

माँ तूने रूप अनेकों धरे
तू है हर विकारों से परे।
तू आदिशक्ति, अनन्त माया
तेरा भेद न किसी ने पाया।

शांतिमयी रूप है तेरा गौरी
विकराल रूप धर, डरे आसुरी।
दुर्गम दैत्य, कर संहार महाकाली
जग के सारे तम मिटा शेरावाली।।

सुख, शांति, समृद्धि दात्री
तू शताक्षी स्वरुपा धात्री।
तू अविनाशी, तू मंगलमूर्ति
तू कल्याणी, तू कामना पूर्ति।

ब्रह्मा, विष्णु, शिव की तू शक्ति
विद्या की दात्री, माँ तू ही भक्ति।
माँ तू ही सबका भाग्य बनाती
माँ तू ही जग में खेल रचाती।

माँ तू ज्वाला सी प्रचंड
तेरी ज्योति अनन्त अखंड।
तू ही असुरों की संहारकर्ता
तू ही जग की पालनकर्ता।

रचयिता
प्रतिभा चौहान,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर,
विकास खंड-डिलारी,
जनपद-मुरादाबाद।

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