कोरोना-अत्याचार
धुन-कौने दिशा में लेके चला रे बटोहिया--------
(फ़िल्म-"नदिया के पार")
कौने दिशा से तू है चला रे कोरोनवा--
ए ठहर-ठहर, तोरा ढाया है कहर
जिनगी जियै दे, जियै दे-----------
तन में तू छाये, बाँधे साँसी कै डगरिया--
तन में तूँ छाये, बाँधे साँसी कै डगरिया--
कहीं गए जो ठहर, तोरा ढायेगा कहर---
जिनगी जियै दे, जियै दे-----------
कौने दिशा से तू है, चला रे कोरोनवा---
पहली बार तू निकला चीन से------
किसी अनजाने के संग हो,--------------
अनजाने से बिखराव बढ़ेगा तो-------
होगी दुनिया, तंग हो-------------------
बहक के तू कहीं, इधर न आना---------
ना करना, मोहें तंग हो-----------------
तंग करने का तोसे नाता महामारिया-----
ना करना मोहे तंग हो--।----------------
हाँ ठहर - ठहर, तोरा ढाया है कहर-----
जिनगी जियै दे, जियै दे---------------
कौने दिशा से तू है, चला रे कोरोनवा----
कितनी दूर अभी, कितनी दूर है---------
ऐ कोरोनवा तोरा ठाँव हो----------------
कितना भय तुमसे लगने लगा है,---------
जब कोई बुलाये तोरा नाम हो।---------
नाम न लें तो क्या, कहके बुलाएँ--------
नाम न लें तो क्या, कहके बुलाएँ----------
कैसे मिटायें तोरा नाम हो---------------
साथी मितवा या अनाड़ी की इ बतिया,---
मानि तू मिटावा एकरा नाम हो-----------
साथी मितवा या अनाड़ी की ई बतिया----
कहीं गये जो ठहर, वक्त जाएगा गुजर--
एकरा रोकन के, रोकन के----------
कौने दिशा से तू है चला रे कोरोनवा।-----
ऐ सुन---जा, इन दिन मेरी सखियाँ--------
कहती हूँ 'जो मैं बात हो-----------------
कहती हूँ मास्क लगाई चलन को तो-
बन जाए कुछ बात हो-------------------
साथ अधूरा तब तक, जब तक--------
मिलते रहेगें हाथ हो ।-------------
कर तू नमस्ते----थोड़ी दुरियैं से रहिके,
सभे जोड़ि आपन हाथ हो–---------
हर दू--दू घण्टा पर तू,--------------------
निक से धोवा हाथ हो------- ---------------
यहिं बतिया से तू, कइके पिरितिया----
पावा विजय देके मात हो----------
ए ठहर-ठहर तू है, ढाया ए कहर ----------
जिनगी जियै दे, जियै दे----------------
कौने दिशा से तू है, चला रे कोरोनवा।
रचयिता
विजय मेहंदी,
सहायक अध्यापक,
KPS(E.M.School)Shudanipur, Madiyahu,
जनपद-जौनपुर।
(फ़िल्म-"नदिया के पार")
कौने दिशा से तू है चला रे कोरोनवा--
ए ठहर-ठहर, तोरा ढाया है कहर
जिनगी जियै दे, जियै दे-----------
तन में तू छाये, बाँधे साँसी कै डगरिया--
तन में तूँ छाये, बाँधे साँसी कै डगरिया--
कहीं गए जो ठहर, तोरा ढायेगा कहर---
जिनगी जियै दे, जियै दे-----------
कौने दिशा से तू है, चला रे कोरोनवा---
पहली बार तू निकला चीन से------
किसी अनजाने के संग हो,--------------
अनजाने से बिखराव बढ़ेगा तो-------
होगी दुनिया, तंग हो-------------------
बहक के तू कहीं, इधर न आना---------
ना करना, मोहें तंग हो-----------------
तंग करने का तोसे नाता महामारिया-----
ना करना मोहे तंग हो--।----------------
हाँ ठहर - ठहर, तोरा ढाया है कहर-----
जिनगी जियै दे, जियै दे---------------
कौने दिशा से तू है, चला रे कोरोनवा----
कितनी दूर अभी, कितनी दूर है---------
ऐ कोरोनवा तोरा ठाँव हो----------------
कितना भय तुमसे लगने लगा है,---------
जब कोई बुलाये तोरा नाम हो।---------
नाम न लें तो क्या, कहके बुलाएँ--------
नाम न लें तो क्या, कहके बुलाएँ----------
कैसे मिटायें तोरा नाम हो---------------
साथी मितवा या अनाड़ी की इ बतिया,---
मानि तू मिटावा एकरा नाम हो-----------
साथी मितवा या अनाड़ी की ई बतिया----
कहीं गये जो ठहर, वक्त जाएगा गुजर--
एकरा रोकन के, रोकन के----------
कौने दिशा से तू है चला रे कोरोनवा।-----
ऐ सुन---जा, इन दिन मेरी सखियाँ--------
कहती हूँ 'जो मैं बात हो-----------------
कहती हूँ मास्क लगाई चलन को तो-
बन जाए कुछ बात हो-------------------
साथ अधूरा तब तक, जब तक--------
मिलते रहेगें हाथ हो ।-------------
कर तू नमस्ते----थोड़ी दुरियैं से रहिके,
सभे जोड़ि आपन हाथ हो–---------
हर दू--दू घण्टा पर तू,--------------------
निक से धोवा हाथ हो------- ---------------
यहिं बतिया से तू, कइके पिरितिया----
पावा विजय देके मात हो----------
ए ठहर-ठहर तू है, ढाया ए कहर ----------
जिनगी जियै दे, जियै दे----------------
कौने दिशा से तू है, चला रे कोरोनवा।
रचयिता
विजय मेहंदी,
सहायक अध्यापक,
KPS(E.M.School)Shudanipur, Madiyahu,
जनपद-जौनपुर।

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