परशुराम जयंती

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में,

तृतीय दिवस जो आता है।

भगवान परशुराम जी का,

अवतरण दिवस कहलाता है।।


जमदाग्नि  के पुत्र थे,

रेणुका था माँ का नाम।

आज्ञाकारी, सुशील थे वे,

तपस्या, बुद्धि बल था मान।।


छठा रूप श्री हरि का,

परशुराम बने अवतार।

दुष्टों के संहार को,

परशु लिये कर धार।।


वैदिक सनातन धर्म का,

किये संस्कृति  प्रसार।

वंदन से जिनके मिलते, 

हमें अक्षय ज्ञान भंडार।।


रचयिता

वन्दना यादव "गज़ल"
सहायक अध्यापक,

अभिनव प्रा० वि० चन्दवक,

विकास खण्ड-डोभी, 
जनपद-जौनपुर।

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