88/2024, बाल कहानी-11 मई
बाल कहानी- सोन और चिड़िया
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एक छोटी चिड़िया थी। सोनू के घर के सामने वाले पेड़ पर उस चिड़िया का घोंसला था। उसके दो बच्चे थे। सोनू को सुबह-सुबह चिड़िया का चहचहाना अच्छा लगता था। चिड़िया के बच्चे इतने छोटे थे कि अभी उनके पंख भी ठीक से नहीं आये थे। चिड़िया रोज अपने बच्चों के लिए दाना लेने जाती थी।
एक दिन बहुत जोर से वर्षा हो रही थी। वह अपने बच्चों को दाना लेने नहीं जा पा रही थी। वह पेड़ की टहनी पर बैठकर इधर-उधर देख रही थी।
सोनू ने चिड़िया से कहा-, "क्या बात है?" चिड़िया बोली-, "आज बहुत तेज बारिश हो रही है। मैं दाना लेने दूर तक नहीं जा सकती हूँ। मैं सभी के घर गयी। मुझे बाहर कोई नहीं दिखा। मुझे बहुत जोर की भूख लगी है। मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं। उनके लिए भी मुझे दाना चाहिए।"
सोनू ने कहा-, "तुम चिन्ता मत करो। हमारे घर में चावल रखा है। उसमें से तुम खाओ और अपने बच्चों को भी ले जाओ।" कुछ देर बाद सोनू ने कहा-, "कल से रोज हमारे घर आना। अनाज के कुछ दाने तुम खाना और अपने बच्चों को भी ले जाना। हम साथ-साथ खेलेंगे और बातें करेंगे।" चिड़िया ने कहा-, "अच्छा ठीक है, मैं जरूर आऊँगी।" अब रोज शाम को चिड़िया सोनू के घर आती और खेलती सोनू भी खुश रहता। सोनू की माँ चिड़िया तथा उसके बच्चों को दाना देती। सोनू और चिड़िया बहुत अच्छे दोस्त बन गये।
संस्कार सन्देश-
हर मनुष्य को पशु-पक्षियों एवं जीव-जन्तुओं की सहायता करनी चाहिए।
लेखिका-
दमयन्ती राणा (स०अ०)
रा० उ० प्रा० वि० ईड़ाबधाणी
कर्णप्रयाग, चमोली (उत्तराखण्ड)
कहानी वाचक
नीलम भदौरिया
जनपद- फतेहपुर
✏️संकलन
📝टीम मिशन शिक्षण संवाद
नैतिक प्रभात
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