माँ
माँ हमसे प्यार क्यों इतना भला तुम यूँ ही करती हो,
कभी लोरी सुनाना तो कभी तुम गीत गाती हो।
ममता की छाँव मे माँ, तुम हमको सुलाती हो,
कभी ऊँगली पकड़ के तुम हमें चलना सिखाती हो।
मुझे बचपन की बातें अब भी, याद दिलाती हो।
माँ हमसे - - - - - - -- - - - - - - - -
दुःख की धूप में माँ तुम सुख की छाया करती हो।
आशाओं के आँगन में खुशी के दीप जलाती हो।
हमारी हर कामनाएँ माँ क्यों पूरी हो।
माँ हमसे- - - - - - - - - - - - - --
दुःखो से टूटकर जब मैं खुद को तन्हा पाती हूँ,
अकेले ही अकेले में घबरा सी ही जाती हूँ।
तुम्हारी एक झलक मुझमें आशा दीप जलाती है।
माँ हमसे प्यार- - - - - - -- - - - -
रचयिता
चारु मित्रा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय गदपुरा,
विकास खण्ड-खंदौली,
जनपद-आगरा।

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