पुण्य प्रभा शुचिता हो तुम

माँ मेरी ममता हो तुम,

माँ मेरी क्षमता हो तुम।

जिसकी हम पूजा करते हैं 

उस प्रभु की समता हो तुम।।


नन्हें कदमों की आहट पर

तुमने निज सर्वस्व लुटाया,

ठिठके पाँव पकड़ कर उँगली

राहों पर चलना सिखलाया।

    संस्कार की पृष्ठभूमि हो

  गुरु की भी गुरुता  हो तुम।।


 ठंड लगी गोदी में लेकर

 थपकी देकर मुझे सुलाया,

 जेठ दुपहरी भरी तपन में

सिर पर की आंचल की छाया।

     वर्षा आंधी तूफानों से,

    लड़ने की दृढ़ता हो तुम।।


देश बहुत से सुंदर होंगे

पर तुमसे  सुंदर ना कोई,

दुनिया के गहरे सागर हों

ममता से गहरा ना कोई।

      एहसासों की परम धुरी हो                          

     पुण्य प्रभा  शुचिता हो तुम।।


जिजीविषा जीवंत रहे नित

मातृत्व दिवस पर यही कामना,

सब बच्चों की अमर रहे माँ

'यशो' करे बस यही प्रार्थना।

      सब उपमान यहाँ  झूठे हैं।

      माँ मेरी अमिता हो तुम।।


माँ मेरी ममता हो तुम,

माँ मेरी क्षमता हो तुम।

जिसकी हम पूजा करते हैं 

उस प्रभु की समता हो तुम।।

     

रचयिता

यशोधरा यादव 'यशो'

सहायक अध्यापक,

कंपोजिट विद्यालय सुरहरा,

विकास खण्ड-एत्मादपुर,

जनपद-आगरा।



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