बच्ची की अभिलाषा
माँ मैं हो गई 6 बरस की
अब मेरा भी नाम लिखवाओ॥
मैं भी स्कूल पढ़ने जाऊँगी
मुझको भी एक बस्ता दिलवाओ॥
क, ख, ग सीखूँगी मैं
फिर अक्षर पढ़ पाऊँगी,
गिनती पहाड़ा सीख कर
जोड़ घटाव कर पाऊँगी॥
पढ़ लिख कर जब थक जाऊँगी
खेलूँगी, कूदूँगी और सुस्ताऊँगी
जब बजेगी छुट्टी की घंटी
घर की ओर दौड़ लगाऊँगी
स्कूल के किस्से और कहानी
तुमको आकर सुनाऊँगी
बैठे-बैठे यूँ मत सोचो अब
मेरा सपना भी सच करवाओ
माँ मैं हो गई 6 बरस की
अब मेरा भी नाम लिखवाओ॥
रचयिता
मनीषा सिंह,
सहायक अध्यापक,
कंपोजिट विद्यालय सुरेहरा,
विकास खण्ड-एत्मादपुर,
जनपद-आगरा।

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