अक्षय तृतीया

जो है गतिशील, अनंत, अक्षय 

जिससे है अस्तित्व  ब्रहमांड का

असीम भंडार  ऊर्जा का 

चलता जिससे व्यापार  तरंगों का। 


है समय अक्षय 

जिसके  घेरे  में  सब

है वो गतिशील, परिवर्तनशील 

साक्षी हर युग का।


है शिक्षा  अक्षय 

काम  आये हर मौके पर 

कर दे परास्त  सबको 

जब हो अक्ल  ठिकाने पर।


है लेखन  अक्षय 

जिससे  सँवरता मानव-जीवन 

लेखन ही बनता इतिहास 

जो है गवाह कर्मों का। 


प्रकृति  के कण-कण में संगीत 

दे रहा  जीवन  में  संगीत 

आ रही  लवों पर मुस्कुराहट

सुन मधुर अक्षय संगीत।


सूरज, चाँद और तारे

पवन, नीर, प्रकृति के उपहार 

हैं  सब परमात्म-शक्ति का विस्तार 

अक्षय  बन कर रही धरती-अम्बर में ऊर्जा का संचार।।


रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका, 
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।

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