नारी को पहचानो
आज जीत गयी निर्भया,
चमकी फिर से तारा बनके।
आसमान में चमक गयी,
सबकी आँखों का तारा बनके।
मिली सजा उन दरिंदों को,
जो चले न्याय का मजाक बनाने
ना होगा अब शोषण किसी का,
ना होगा अब अपमान किसी का
निर्भया से निर्भय होगा,
अब स्त्री का सम्मान होगा।
जो मजाक बनाते हैं स्त्री का,
अब नाश उन सबका होगा।।
करो सम्मान उस नारी का,
जिसने तुम्हें जन्म दिया।
ना कर सको इज्जत उसकी,
तो दुनिया से जाना होगा।
अब तो तुम समझ जाओ,
स्त्री से बढ़कर कोई नहीं।
जिसको तुम रौंदते हो,
उससे बढ़कर कोई नहीं।।
निर्भया अमर हो गयी,
महिलाओं को नयी दिशा दे गयी।
अब ना झुकेगी ये तो महान हो गई
न्याय से तृप्त अब तृप्त हो गयी।।
रचयिता
ललिता रानी,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उस्मानपुर,
विकास खण्ड-डिलारी,
जनपद-मुरादाबाद।
चमकी फिर से तारा बनके।
आसमान में चमक गयी,
सबकी आँखों का तारा बनके।
मिली सजा उन दरिंदों को,
जो चले न्याय का मजाक बनाने
ना होगा अब शोषण किसी का,
ना होगा अब अपमान किसी का
निर्भया से निर्भय होगा,
अब स्त्री का सम्मान होगा।
जो मजाक बनाते हैं स्त्री का,
अब नाश उन सबका होगा।।
करो सम्मान उस नारी का,
जिसने तुम्हें जन्म दिया।
ना कर सको इज्जत उसकी,
तो दुनिया से जाना होगा।
अब तो तुम समझ जाओ,
स्त्री से बढ़कर कोई नहीं।
जिसको तुम रौंदते हो,
उससे बढ़कर कोई नहीं।।
निर्भया अमर हो गयी,
महिलाओं को नयी दिशा दे गयी।
अब ना झुकेगी ये तो महान हो गई
न्याय से तृप्त अब तृप्त हो गयी।।
रचयिता
ललिता रानी,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उस्मानपुर,
विकास खण्ड-डिलारी,
जनपद-मुरादाबाद।

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