होली का त्योहार

"स्नेहमयी रंगों से ओतप्रोत ये होली का त्योहार।
मनभावन गुझिया, पापड़ बड़े ही जायकेदार।।                     
सब रंगों ने त्याग दिया है अपना मूलस्वरूप।         
स्नेहसागर में डुबकी ले सब हो गये  एकाकार।।                       
नहीं रहा कोई भेदभाव न ही संकीर्णता।                           
सब रंगों ने त्याग दिया है अपनी-अपनी निजता।।         
त्यागमयी रंगों से ओतप्रोत ये होली का त्योहार।               
देकर के सन्देश प्रेम का सब हो गये एकाकार।।                 
रंगों के हर स्वरूप मानव मन में भी रहते हैं।                   
पर न जाने क्यों त्याग के इनको वैमनस्यता रखते हैं।।               
भूल के सारी कटुता त्याग दो सारे मनमुटाव।                 
होली की भई सीख यही सर्वोपरि है प्रेम भाव।।                     
राधा- कृष्ण के पावन प्रेम सा ये फूलों का त्योहार।           
कपटहीन रंगों से ओतप्रोत ये होली का त्योहार।।

रचयिता
रश्मि पाण्डेय,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय चक अलादातपुर,
विकास खण्ड-हथगाम, 
जनपद-फतेहपुर।

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