इक्कीसवीं सदी की नारी
शोषण के विरूद्ध आवाज बुलन्द है,
दकियानूसी जंजीरों से मुक्त समाज की स्तम्भ है।
प्रकृति का अनुपम उपहार है,
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
कठिन परिस्थितियों में परिवार की धैर्य धारक है,
निर्जल व्रत रहकर परिवार की उद्धारक है।
कौशल आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में समझदार है।
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
पीढ़ियों के निर्माण की पहचान है,
खेल - कूद, समाज, विज्ञान में बढ़ा रही शान है।
तीन तलाक दहेज जैसी कुरीतियों को रोकने की मजबूत दीवार है,
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
देश के विकास और प्रगति में योगदान है,
दया त्याग करुणा संग वात्सलय महान है,
सभ्यता संस्कृति की पहचान है।
समय के साथ चलते हुए भी न खोई शिष्टाचार है,
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
रचयिता
दकियानूसी जंजीरों से मुक्त समाज की स्तम्भ है।
प्रकृति का अनुपम उपहार है,
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
कठिन परिस्थितियों में परिवार की धैर्य धारक है,
निर्जल व्रत रहकर परिवार की उद्धारक है।
कौशल आत्मविश्वास से हर क्षेत्र में समझदार है।
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
पीढ़ियों के निर्माण की पहचान है,
खेल - कूद, समाज, विज्ञान में बढ़ा रही शान है।
तीन तलाक दहेज जैसी कुरीतियों को रोकने की मजबूत दीवार है,
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
देश के विकास और प्रगति में योगदान है,
दया त्याग करुणा संग वात्सलय महान है,
सभ्यता संस्कृति की पहचान है।
समय के साथ चलते हुए भी न खोई शिष्टाचार है,
सम्मान प्रशंसा प्यार की हकदार है।।
रचयिता
रवीन्द्र नाथ यादव,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय कोडार उर्फ़ बघोर नवीन,
विकास क्षेत्र-गोला,
विकास क्षेत्र-गोला,
जनपद-गोरखपुर।

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