हम एक रंग अनेक
रंगों की बहार है,
होली का त्योहार है।
उड़े रंग, अबीर-गुलाल,
मन में न रखना कोई मलाल।
अतिथि को देते सम्मान,
गुझिया व अन्य पकवान।
बच्चों की तो मौज ही मौज है,
होता क्यों न हर पर्व रोज है।
इस दिन भूलकर सारे गम,
खुशियाँ बाँटें हम हर दम।
हो चाहे कोई धर्म या भाषा,
मन में रखो प्रेम की अभिलाषा।
चाहे हो कोई त्योहार,
बहे खुशियों की बहार।
मेल मिलाप भाई चारा,
आया होली त्योहार प्यारा।
रचयिता
लक्ष्मी वर्मा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय पपियापुर,
विकास खण्ड-बढ़पुर
जनपद-फर्रुखाबाद।
होली का त्योहार है।
उड़े रंग, अबीर-गुलाल,
मन में न रखना कोई मलाल।
अतिथि को देते सम्मान,
गुझिया व अन्य पकवान।
बच्चों की तो मौज ही मौज है,
होता क्यों न हर पर्व रोज है।
इस दिन भूलकर सारे गम,
खुशियाँ बाँटें हम हर दम।
हो चाहे कोई धर्म या भाषा,
मन में रखो प्रेम की अभिलाषा।
चाहे हो कोई त्योहार,
बहे खुशियों की बहार।
मेल मिलाप भाई चारा,
आया होली त्योहार प्यारा।
रचयिता
लक्ष्मी वर्मा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय पपियापुर,
विकास खण्ड-बढ़पुर
जनपद-फर्रुखाबाद।

Comments
Post a Comment