खेलें रे होली
आओ सब मिलकर, खेलें रे होली।
आओ मनायें वासंती होली रे। आओ मिल- जुलकर.....
मिलजुल कर सब फाग है गायें,
कुसुम-किसलयों से रंग बनायें।
मुख पर मल-मल गुलाल लगायें,
भर पिचकारी मारे हैं गोरी।
आओ सब मिलकर खेले रे होली। आओ मिल-जुल कर.........
फाग महीना, रंग भरे बादल,
नयन कटारे, नयन भरे काजल।
मटकी लिये, छिपत फिरे गोरी,
हाथों में रंग भर मुस्काए रे टोली।
आओ सब मिलकर खेलें रे होली,
आओ मनायें वासंती होली रे। आओ मिल-जुलकर......
घर-घर आँगन, कोलाहल है,
राग-रागिनी संग, हँसत-बोलत हैं।
रंग, पिचकारी लिए, सब डोलत हैं,
काहे को मारी तू हमें पिचकारी। आओ सब मिलकर खेलें रे होली, आओ मनाएँ वासंती होली। आओ सब मिलजुल कर ....
रचयिता
सुनीता बहुगुणा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिजनी बड़ी,
विकास क्षेत्र - यमकेश्वर,
जनपद - पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।
आओ मनायें वासंती होली रे। आओ मिल- जुलकर.....
मिलजुल कर सब फाग है गायें,
कुसुम-किसलयों से रंग बनायें।
मुख पर मल-मल गुलाल लगायें,
भर पिचकारी मारे हैं गोरी।
आओ सब मिलकर खेले रे होली। आओ मिल-जुल कर.........
फाग महीना, रंग भरे बादल,
नयन कटारे, नयन भरे काजल।
मटकी लिये, छिपत फिरे गोरी,
हाथों में रंग भर मुस्काए रे टोली।
आओ सब मिलकर खेलें रे होली,
आओ मनायें वासंती होली रे। आओ मिल-जुलकर......
घर-घर आँगन, कोलाहल है,
राग-रागिनी संग, हँसत-बोलत हैं।
रंग, पिचकारी लिए, सब डोलत हैं,
काहे को मारी तू हमें पिचकारी। आओ सब मिलकर खेलें रे होली, आओ मनाएँ वासंती होली। आओ सब मिलजुल कर ....
रचयिता
सुनीता बहुगुणा,
सहायक अध्यापक,
राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय बिजनी बड़ी,
विकास क्षेत्र - यमकेश्वर,
जनपद - पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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